बहरैन में आगामी आम चुनाव के बहिष्कार की मांग को लेकर जनता ने प्रदर्शन किया।
प्रेस टीवी के अनुसार बहरैन में आले ख़लीफ़ से सत्ता छोड़ने की मांग और आगामी आम चुनाव के बहिष्कार के लिए शुक्रवार को राजधानी मनामा के पश्चिमोत्तर में स्थित दिराज़ गांव में जनता सड़कों पर आयी और इसी प्रकार का प्रदर्शन मनामा के पूर्वोत्तर में स्थित सितरा द्वीप और मनामा से निकट नुवैदरात गांव में हुआ। प्रदर्शन में भाग लेने वाले आले ख़लीफ़ा से सत्ता छोड़ने पर आधारित नारे लगा रहे थे।
बहरैन के सबसे बड़े विपक्षी दल अलवेफ़ाक़ नेश्नल इस्लामी सोसायटी ने बल दिया है कि विपक्ष नवंबर में इस देश में प्रस्तावित आम चुनाव के बहिष्कार का संकल्प रखता है। पिछले शनिवार को अलवेफ़ाक़ दल ने 22 नवंबर के प्रस्तावित चुनाव के बहिष्कार की घोषणा की थी।
बहरैन में यह चुनाव इस देश में 2011 को शुरु हुयी जनक्रान्ति के समय से पहला चुनाव होगा। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रजातांत्रिक ढंग से नहीं होंगे और यह केवल इस देश की सत्ता पर दशकों से शासन करने वाले आले ख़लीफ़ा को मान्यता देगा। बहरैन में मध्य फ़रवरी 2011 से अब तक इस देश की सड़कों पर आले ख़लीफ़ा से सत्ता छोड़ने की मांग को लेकर अनगनत प्रदर्शन हो चुके हैं।
सैकड़ों लोगों को शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में भाग लेने के कारण नौकरियों से निकाल दिया गया और बहुत से डाक्टरों और नर्सों को इसलिए जेल में डाल दिया गया क्योंकि उन्होंने बहरैनी पुलिस की बर्बरता में घायल होने वाले आम लोगों का उपचार किया था।
बहरैन में अमरीका का पांचवां नौसैनिक बेड़ा है।
14 मार्च 2011 को सउदी अरब और संयुक्त अरब इमारात ने बहरैन पर चढ़ाई की ताकि बहरैनी शासन की शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दमन में सहायता कर सके।
जून में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने मनामा शासन की इस देश में मानविधकार के उल्लंघन के कारण भर्त्सना की थी।
18 अक्टूबर 2014 - 18:47
समाचार कोड: 645231
बहरैन में आगामी आम चुनाव के बहिष्कार की मांग को लेकर जनता ने प्रदर्शन किया।